DTC P0155

22.01.2026
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P0155

कार का इंजन और/या ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन
कोड: P0155 - ऑक्सीजन (O2) सेंसर हीटर सर्किट बैंक 2 सेंसर 1 में खराबी है, जिससे इंजन की हवा-ईंधन मिश्रण निगरानी प्रभावित हो सकती है।

देखो, जब आपकी कार के कंप्यूटर में P0155 कोड आ जाए, तो इसका मतलब सीधा-सीधा है – "O2 सेंसर हीटर सर्किट में गड़बड़ (बैंक 2, सेंसर 1)।" अब, इसे मैं अपनी भाषा में समझाऊं तो, आपकी गाड़ी के इंजन के जिस हिस्से में बैंक 2 का सेंसर 1 लगा है, वहां का ऑक्सीजन सेंसर जल्दी-से-जल्दी सही टेम्परेचर तक पहुंचे इसके लिए उसमें एक हीटर लगा रहता है। ये सेंसर एग्जॉस्ट में ऑक्सीजन नापता है ताकि गाड़ी का कंप्यूटर (PCM या ECM) फ्यूल का सही मिक्स बनाए रख सके। जब इस हीटर सर्किट में कहीं वोल्टेज या करंट का मसला आ जाता है, तो कंप्यूटर फौरन P0155 फेंक देता है और डैशबोर्ड पे चेक इंजन लाइट जला देता है। कई बार लोग पूछते हैं – 'बैंक 2, सेंसर 1' आखिर है क्या? सीधा सा फंडा है – ये सेंसर उस हिस्से में होता है जहां सिलेंडर नंबर 2 की लाइन होती है। तो, कुल मिलाकर, आपकी गाड़ी को सांस लेने में दिक्कत हो रही है, और ये कोड उसी की खबर देता है।

विषय-सूची

कारण और P0155

अब इतने सालों में मैंने जितनी गाड़ियां देखी हैं, उनमें ये कोड अक्सर इन्हीं वजहों से आता है:

  • O2 सेंसर हीटर की 12V सप्लाई कहीं से कट गई या कनेक्शन ढीला हो गया।
  • हीटर का ग्राउंड ठीक से कनेक्ट नहीं है – जंग लग गई या वायरिंग में कट लग गया।
  • हीटर कंट्रोल सर्किट में शॉर्ट या ओपन – यानी वायरिंग में कहीं जोड़ ढीला या तार आपस में सटा हुआ।
  • O2 सेंसर का कनेक्टर टूट गया, गंदा हो गया या उसमें पानी घुस गया।
  • हीटर खुद ही जवाब दे गया – ये सबसे आम वजह है, खासकर पुरानी गाड़ियों में।
  • बैटरी वोल्टेज कम है – कई बार लोग ध्यान ही नहीं देते, पर लो वोल्टेज सेंसर को परेशान कर देता है।
  • PCM यानी गाड़ी का कंप्यूटर ही कहीं गड़बड़ कर गया (बहुत रेयर केस, पर देखा है ये भी)।
  • कभी-कभी EGR सिस्टम की होज़ खुल जाती है, और गाड़ी गच्चा दे जाती है।

ज्यादातर बार, या तो सेंसर का हीटर चला जाता है या फिर उसकी वायरिंग में झोल आ जाता है।

लक्षण और dtc P0155

अब जब ये कोड एक्टिव हो जाता है, तो कार कुछ न कुछ इशारे जरूर देती है। सबसे आम तो –

  • चेक इंजन लाइट का जलना। भाई, ये तो पहली घंटी है कि कुछ गड़बड़ है।
  • माइलेज कम हो जाता है – पेट्रोल या डीजल खाते-खाते गाड़ी का पेट जैसे बड़ा हो गया हो!
  • इमिशन टेस्ट फेल – गाड़ी पॉल्यूशन में पास नहीं होती, और चालान कट सकता है।

मजेदार बात ये है कि कई बार गाड़ी चलाने में कोई खास फर्क नहीं लगता, बस पेट्रोल की टंकी जल्दी खाली होने लगती है और वो इंजन लाइट जली रहती है।

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निदान और eobd obdii P0155

अब बात करते हैं असली चेकअप की। मैं हमेशा सिंपल से शुरू करता हूं – सबसे पहले ये पक्का कर लो कि O2 सेंसर (बैंक 2, सेंसर 1) कहां है। फिर:

  • पहला काम – सेंसर का कनेक्टर गौर से देखो। कई बार उसमें पिन जले, मुड़े या गंदे मिलेंगे।
  • फिर उसकी वायरिंग पूरी फॉलो करो – कोई कट, जलन, टेप का जुगाड़ या ढीला कनेक्शन हो तो नोट करो।
  • फ्यूज चेक करना मत भूलना – कई बार हीटर का फ्यूज उड़ जाता है और लोग सेंसर बदलते रहते हैं!
  • अगर ऊपर सब सही है, तो मल्टीमीटर से हीटर टर्मिनल्स पर रेसिस्टेंस नापो। आमतौर पर 6 ओम के आस-पास दिखना चाहिए। ओपन (अनंत) या जीरो रेसिस्टेंस है तो हीटर गया।
  • मल्टीमीटर नहीं है? तो एक जुगाड़ बताता हूं – सेंसर निकालो, हीटर वायरिंग पर टेल लाइट का बल्ब लगाओ, और हार्नेस में प्लग करके इंजन स्टार्ट करो। बल्ब जले तो पावर-ग्राउंड सही है, ना जले तो वहीं दिक्कत है।
  • अगर पावर या ग्राउंड नहीं आ रहा, तो रिले, फ्यूज और पूरी वायरिंग चेक करते चलो।
  • सब चेक करने के बाद भी मसला है, तो सीधा सेंसर बदल दो – 90% केस में यही हल है।

हर स्टेप पे धैर्य रखो, और कभी-कभी किसी समझदार दोस्त की मदद भी ले सकते हो।

dtc p0155

आम गलतियाँ और trouble code P0155

देखो, मैंने कई बार देखा है कि लोग इन चीजों में चूक कर बैठते हैं:

  • गलत बैंक या गलत सेंसर बदल देना – लोकेशन कन्फर्म करो, नहीं तो पैसा और वक्त दोनों खराब!
  • सिर्फ सेंसर बदलना, बिना वायरिंग या फ्यूज देखे – बाद में फिर से वही कोड आ जाता है।
  • कनेक्टर की सफाई या फिटिंग को इग्नोर करना – ढीला कनेक्शन पूरा खेल बिगाड़ देता है।
  • मल्टीमीटर से रेसिस्टेंस चेक करते वक्त गलत पिन पकड़ लेना – सही टर्मिनल्स जानना जरूरी है।
  • बैटरी वोल्टेज या ग्राउंड सप्लाई को नजरअंदाज करना – बिना वोल्टेज के कुछ नहीं चलेगा।

ये स्टेप्स स्किप करोगे तो हर महीने वर्कशॉप के चक्कर काटने पड़ेंगे।

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गंभीरता और fault code P0155

सीधी बात करूं तो – ये प्रॉब्लम गाड़ी को तुरंत सड़क पर नहीं रोकती, लेकिन इग्नोर करने का मतलब है खर्चा बढ़ाना। माइलेज घटेगा, इंजन की परफॉर्मेंस डाउन होगी, और इमिशन टेस्ट में फेल हो सकते हो। ऊपर से, ज्यादा देर तक ऐसे ही चलाते रहे तो कैटेलिटिक कन्वर्टर भी खराब हो सकता है – और भाई, उसकी कीमत सुन के पसीना आ जाएगा! यानी, जितनी जल्दी ठीक करवाओ, उतना अच्छा।

मरम्मत और code P0155

अब असली मरम्मत की बात करूं तो, मेरे हाथों में जितनी गाड़ियां आई हैं उनमें ये स्टेप्स सबसे कामयाब रहे:

  • O2 सेंसर (बैंक 2, सेंसर 1) बदल दो – अगर हीटर खराब है तो और कुछ सोचो ही मत।
  • सेंसर के कनेक्टर और वायरिंग की अच्छे से सफाई या मरम्मत कर दो – अक्सर जंग या कट की वजह से दिक्कत आती है।
  • फ्यूज या रिले बदलना – अगर पावर सप्लाई में दिक्कत है तो छोटा खर्चा है, बड़ा झंझट बच जाता है।
  • PCM को चेक करो – बहुत कम मामलों में कंप्यूटर ही गड़बड़ करता है, लेकिन पूरा चेकअप जरूरी है।
  • बैटरी वोल्टेज चेक करो – अगर बैटरी ढीली है तो नई लगाओ, वरना सेंसर बार-बार परेशान करेगा।

ध्यान रहे, सही पार्ट और सही जगह का पता पक्का करके ही रिपेयर करो। अंदाजे से कुछ मत बदलना।

निष्कर्ष

तो, कुल जमा बात ये है कि P0155 का मतलब है आपकी गाड़ी के O2 सेंसर के हीटर सर्किट में झोल है (बैंक 2, सेंसर 1)। ये फ्यूल की खपत बढ़ा देगा और इमिशन टेस्ट में गाड़ी को फेल करवा सकता है। सबसे पहले कनेक्टर, वायरिंग, और फ्यूज की जांच करो – उसके बाद सेंसर खुद। ज़्यादातर केस में सेंसर बदलना ही पक्का इलाज है। इसे टालने से बाद में बड़ा खर्चा हो सकता है, तो जितनी जल्दी हो, डाइग्नोस और रिपेयर करवा लो – यही है असली मेकेनिक की सलाह।

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